Dec 18, 2021
चंद्र हो 1 में या मेष का शादी के 24 से 28 में प्रबल योग बनते है, हमदर्दी दिखाने की आदत या ओवर emotional यह लोग बनते है।
✍GRS
Dec 18, 2021
चंद्र 8
अरमानों की चिता को cool कौन करेगा, दुआएँ मेरी कबूल कौन करेगा।
Dec 14, 2021
When you have #Moon in 1st, 2nd or 4th house in your horoscope.
Dec 11, 2021
चंद्र लगन में तो:
उच्च 2 - परिवार का साथ, पैसे saving,
Good 4 ,9 - entertainment, luxury, higher education, तीर्थ
Dec 10, 2021
चंद्र 8
जिंदगी ने हमसे वसूला #हफ्ता ऐसे, ना रही खुशियां और ना रहे पैसे।
✍GRS
Dec 09, 2021
चंद्र हो 2 में तो घर के किसी 2 सदस्यों का जन्मदिन 2 महीनों के अंदर होगा, छत पर रहना भाग्य के हर दरवाजे खोल देगा।
✍GRS
Dec 09, 2021
चंद्र हो odd घरों में तो purse में नोटों की गिनती भी odd होगी, हो कहीं अगर even घरों में तो नोटों की गिनती भी even by god होगी। RS
Nov 26, 2021
चंद्र 8
अपनी कमाई से कभी ना हुई ठाठ,
पैसे दूसरों के करवा ही देते हैं ऐश।
P.S उल्टी गंगा हो के तारे...
Nov 25, 2021
Song dedicated to Moon 8.
Nov 25, 2021
चंद्र 8 वाले Oat Milk पीया कर, कभी कभी श्मशान के शिव मंदिर में दुध चढ़ा प्राथना किया कर।
✍GRS
Nov 25, 2021
चंद्र 8
कुएँ तालाब दरिया से दूर घर बनाना, आस पड़ोस में विधवा हो तो उसका आशिर्वाद पाना।
✍GRS
Nov 25, 2021
चंद्र 8
कोई बूढ़ी या विधवा गृहस्थ की चक्की में रोड़े डालती है,
इसकी खुशियो की चिता जादू टोना कर के भी बालती है।
✍GRS
Nov 25, 2021
चंद्र 8
बड़े भाई का सुख कम ही मिलता है, जिंदगी में खुशियां कम और अधिक ग़म ही मिलता है।
✍GRS
Nov 25, 2021
चंद्र 8
माँ की height छोटी पर हिम्मत बड़ी, लंबी उम्र पर रहती है कोई ना कोई परेशानी खड़ी ।
✍GRS
Nov 25, 2021
चंद्र 8 में होगी पैसे की बरकत और दुख होंगे खामोश,
अगर घर में ले आयेगा नीम का चांदी का या फोटो white rearing horse.
✍GRS
Nov 18, 2021
आज चंद्र grahan कौन कौन dekhega??? और कौन कौन उपाय कर रहा है???👇👇👇
Nov 17, 2021
चंद्र1,2,10,11,12 घर में कोई ना कोई शिव भक्त ज़रूर होता है, बंदा अंदर से जितना मर्ज़ी हो दुखी लोगों के सामने कम रोता है।
✍️GRS
Nov 17, 2021
बेटी की शक्ल माँ पर अच्छी पुत्र की अच्छी पिता पर, पर मिलते होते नैन नक्श या हरकतें माँ से चंद्र जब भी आए 1 4 घर।
✍GRS
Nov 17, 2021
चंद्रमा की पत्नियां बोहत पर दिल आया रोहिणी पर,
बन्दे के होते multiple affairs जब हो चंद्रमा 1,3,4,7,9,11 घर।
✍GRS
Oct 10, 2021
Taken by my Samsung #Moon
Oct 10, 2021
चंद्र (पैसा)खाना 2 जब खाना 12 में खर्च कीया; 1 से 11 के सभी भाव को ख़ुश कीया: रोग खाना6 जब आया बीमारी बन खाना8 से सारी कुंडली को क्रॉस(8:2:6:12) X कीया।
Oct 08, 2021
चंद्र 1 से 6 हो तो दिन में अधिक प्यास लगती है, 7 से 12 हो तो रात में l verify करें 🙏
Oct 02, 2021
चंद्र 5 8
तम्मना क्यूँ करते हो उसकी जो कभी मिलेगा नही, लाख कर लो कोशिश रेगिस्तान में कमल खिलेगा नही।
Oct 01, 2021
Is Hemp milk available in India???
Very good remedy for moon 8 and 10
Sep 30, 2021
चंद्र हो जो 2,4,6,8,12 घरों में बंदा पैसे जरूर छुपाता है, हो जो 1,3,5,7,9,11 तो show-off करवाता है।
✍Er. Rohit Sharma
Jul 24, 2021
चंद्र 7
घुटने माता के रिप्लेस करवा देता है, नहीं तो सास बहु का क्लेश करवा देता है।
✍Er. Rohit Sharma
Jul 23, 2021
अक्स नज़र आता है मुझे मेरा ही पानी में, twist यही होता है चंद्र 6 की कहानी में।
✍️Er. Rohit Sharma
Jul 23, 2021
चंद्र 6
पानी स्थिर पड़ा कभी कभी आईना भी बन जाता है, ईक बूँद भी गिरे उसमें तो धुंधला नज़र आता है।
✍️Er. Rohit Sharma
Jul 22, 2021
चंद्र 6 में दूसरों के साथ जैसा करोगे वैसा होगा बता रहा है, फिर पूछना ईस से पानी का दान करने वाला क्यूँ पछता रहा है।
Jul 19, 2021
चंद्र 1
हमें आता नहीं ग़ालिब पीठ पीछे वार करना, हमने तो सीखा है कांटों से भी प्यार करना।
✍Er. Rohit Sharma
Jul 18, 2021
चंद्र 8 में लिखा है उल्टी गंगा हो के तारे समझ किसी expert को आती नही है, महाभारत में गंगा पुत्र भीष्म की व्यथा समझ लो मेरी नज़्म भी पूरी गुत्थी सुलझाती नही है।
✍️Er. Rohit Sharma
Jul 18, 2021
चंद्र 1/4 माता का भक्त 2/12 पैसे का पीर, 10 में होवे शिव भक्त और 8 में गंगा पुत्र के शरीर वाला तीर।
✍️Er. Rohit Sharma
Jul 17, 2021
चंद्र 11 बहुत ही अच्छा जब तक घर में गंगा जल क़ायम रहे, औलाद हो गोरी चिट्टी; बच्चे बहुत सुंदर है हर कोई यह तुझसे कहे।
✍️Er. Rohit Sharma
Jul 13, 2021
चंद्र चलाना है लाख बार चलाए, पर एक बार कुदरती पानी और गंगा जल घर लेकर अवश्य आए।
✍Er. Rohit Sharma
Jul 06, 2021
चंद्र 12
जब भी अच्छा काम होने लगेगा क्लेश पड़ेगा, याँ सास तुझसे लड़ेगी याँ तू बीवी से लड़ेगा।
✍Er. Rohit Sharma
Jul 05, 2021
लंबी रातें गहरी बातें चंद्र 8 वाले की, रातों में बातें लाख करवा लो पर ना बात करो उजाले की।
✍Er. Rohit Sharma
May 31, 2021
Moon 10/11 remedy
May 21, 2021
पानी में पीर का वास माना जाता है कुछ लोग दीपावली पे नलके टैप के नीचे दीपक जलाते है तो कुछ लोग रात को नदी कुएँ के पास जाने को मना करते है। इसका लिंक चंद्र 11 से है।
May 18, 2021
देखनी है तबाही मैंने दुश्मन की यार, चंद्र 11 है और ख़ाली है चार।
✍️Er. Rohit Sharma
May 18, 2021
चंद्र 11 बेवजह की टीस देता रहता है, या टाँगो में शिवेरिंग या मेरा कोई नही कहता है।
✍️Er. Rohit Sharma
May 17, 2021
Buri Nazar wale tera Moonh kaala...
May 17, 2021
चंद्र 11 टूटे टोपस या मिसिंग टोपस अक्सर घर में होते है,
ऐसे लोग मैंने देखे कम ही दिन में सोते है।
✍️Er. Rohit Sharma
May 17, 2021
आए चंद्र गोचर में जो ग्यारा, बंदा गिने पैसे हाथ में या बैंक का चक्कर लगे यारा।
✍️Er. Rohit Sharma
May 14, 2021
चंद्र 11 हो तो friday night रास नही आती, अपनी girl friend भी पास नही आती।
✍️Er. Rohit Sharma
May 06, 2021
चंद्र 8
बिखरा हूँ ऐसे जैसे धरती पे समंदर बिखरा है, प्यासा बोहत हूँ पर पानी खारा निकला है।
✍️Er. Rohit Sharma
May 04, 2021
चंद्र 11 वाले घर में पत्थर रख ग़ाढ़ के,
पैसे आयेंगे छप्पर फाड़ के।
✍️Er. Rohit Sharma
Apr 26, 2021
From whatsapp msg
तुलसी जी को तोडने के नियम!!
1. तुलसी जी को नाखूनों से कभी नहीं तोडना चाहिए,नाखूनों के तोडने से पाप लगता है।
2.सांयकाल के बाद तुलसी जी को स्पर्श भी नहीं करना चाहिए ।
3. रविवार को तुलसी पत्र नहीं
तोड़ने चाहिए ।
4. जो स्त्री तुलसी जी की पूजा करती है। उनका सौभाग्य अखण्ड रहता है । उनके घर
सत्पुत्र का जन्म होता है ।
5. द्वादशी के दिन तुलसी को नहीं तोडना चाहिए ।
6. सांयकाल के बाद तुलसी जी लीला करने जाती है।
7. तुलसी जी वृक्ष नहीं है! साक्षात् राधा जी का अवतार है ।
8. तुलसी के पत्तो को चबाना नहीं चाहिए।
#घर_में_जरूर_लगाएं_तुलसी_का_पौधा_जानें_महत्व_और_नियम
तुलसी के पौधे का महत्व धर्मशास्त्रों में भी बखूबी बताया गया है. तुलसी के पौधे को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे से कई आध्यात्मिक बातें जुड़ी हैं. शास्त्रीय मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु को तुसली अत्यधिक प्रिय है. तुलसी के पत्तों के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है. क्योंकि भगवान विष्णु का प्रसाद बिना तुलसी दल के पूर्ण नहीं होता है. तुलसी की प्रतिदिन का पूजा करना और पौधे में जल अर्पित करना हमारी प्राचीन परंपरा है. मान्यता है कि जिस घर में प्रतिदिन तुलसी की पूजा होती है, वहां सुख-समृद्धि, सौभाग्य बना रहता है. धन की कभी कोई कमी महसूस नहीं होती.
- जिस घर में तुलसी का पौधा होता है उस घर की कलह और अशांति दूर हो जाती है. घर-परिवार पर मां लक्ष्मी जी की विशेष कृपा बनी रहती है.
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के पत्तों के सेवन से भी देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है. जो व्यक्ति प्रतिदिन तुलसी का सेवन करता है, उसका शरीर अनेक चंद्रायण व्रतों के फल के समान पवित्रता प्राप्त कर लेता है.
- तुलसी के पत्ते पानी में डालकर स्नान करना तीर्थों में स्नान कर पवित्र होने जैसा है. मान्यता है कि जो भी व्यक्ति ऐसा करता है वह सभी यज्ञों में बैठने का अधिकारी होता है.
- भगवान विष्णु का भोग तुलसी के बिना अधूरा माना जाता है. इसका कारण यह बताया जाता है कि तुलसी भगवान विष्णु को बहुत प्रिय हैं.
- कार्तिक महीने में तुलसी जी और शालीग्राम का विवाह किया जाता है. कार्तिक माह में तुलसी की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
- शास्त्रों में कहा गया है कि तुलसी पूजन और उसके पत्तों को तोड़ने के लिए नियमों का पालन करना अति आवश्यक है.
तुलसी पूजन के नियम
- तुलसी का पौधा हमेशा घर के आंगन में लगाना चाहिए. आज के दौर में में जगह का अभाव होने की वजह तुलसी का पौधा बालकनी में लगा सकते है.
- रोज सुबह स्वच्छ होकर तुलसी के पौधे में जल दें और एवं उसकी परिक्रमा करें.
- सांय काल में तुलसी के पौधे के नीचे घी का दीपक जलाएं, शुभ होता है.
- रविवार के दिन तुलसी के पौधे में दीपक नहीं जलाना चाहिए.
- भगवान गणेश, मां दुर्गा और भगवान शिव को तुलसी न चढ़ाएं.
- आप कभी भी तुलसी का पौधा लगा सकते हैं लेकिन कार्तिक माह में तुलसी लगाना सबसे उत्तम होता है.
- तुलसी ऐसी जगह पर लगाएं जहां पूरी तरह से स्वच्छता हो.
- तुलसी के पौधे को कांटेदार पौधों के साथ न रखें
तुलसी की पत्तियां तोड़ने के भी कुछ विशेष नियम हैं-
- तुलसी की पत्तियों को सदैव सुबह के समय तोड़ना चाहिए. अगर आपको तुलसी का उपयोग करना है तो सुबह के समय ही पत्ते तोड़ कर रख लें, क्योंकि तुलसी के पत्ते कभी बासी नहीं होते हैं.
- बिना जरुरत के तुलसी को की पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए, यह उसका अपमान होता है.
- तुलसी की पत्तियां तोड़ते समय स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें.
- तुलसी के पौधे को कभी गंदे हाथों से न छूएं.
- तुलसी की पत्तियां तोड़ने से पहले उसे प्रणाम करेना चाहिए और इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए- महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते.
- बिना जरुरत के तुलसी को की पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए, यह उसका अपमान होता है.
- रविवार, चंद्रग्रहण और एकादशी के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिए.
"तुलसी वृक्ष ना जानिये।
गाय ना जानिये ढोर।।
गुरू मनुज ना जानिये।
ये तीनों नन्दकिशोर।।
अर्थात-
तुलसी को कभी पेड़ ना समझें
गाय को पशु समझने की गलती ना करें और गुरू को कोई साधारण मनुष्य समझने की भूल ना करें, क्योंकि ये तीनों ही साक्षात भगवान रूप हैं।
Apr 08, 2021
चंद्र हो जो 10 में तो बाबा बर्फ़ानी की फ़ोटो घर में लगा लेनी चाहिए, ज़रा ज़रा सी दाढ़ी बंदे को बड़ा लेनी चाहिये।
✍️Er. Rohit Sharma
Mar 07, 2021
Chandra 10
वक्त पे निकल जाता हूँ तो ख़ाली हाथ आता हूँ, हो जाता हूँ जो ज़रा सा late तो लोग कहते हैं great।
✍️Er. Rohit Sharma
Mar 04, 2021
किताबें बहुत सी पढ़ी होगी तूने मगर कोई चेहरा क्या किसी का पढ़ा है,
चंद्र लगन वाला फ़ेस रीड कर के बता देता है के बंदे के दिल में चल रहा क्या है।
✍️Er. Rohit Sharma
Mar 04, 2021
चंद्र लगन वाले चिंता चिता समान होगी,
स्त्री को खुश ना कर पाना मंदे चंद्र की पहचान होगी।
✍️Er. Rohit Sharma
Mar 04, 2021
🌔 चंद्र लगन वाले फ़ेस चमका के रखा कर,
कभी कभी खीर शिव मंदिर में देकर चखा कर।
✍️Er. Rohit Sharma
Mar 02, 2021
चंद्र 10 दोस्तो बुरा नहीं है होता,
जब तक रहे जातक गाड़ी अपनी धोता।
✍️Er. Rohit Sharma
Mar 02, 2021
चंद्र 12 करवा देता है बंदे की ख्वाहिशें कम,
ख़ुशी हो या ग़म अकेले ही हैं हम।
✍️Er. Rohit Sharma
Mar 02, 2021
उत्तम ज्योतिषी बन ने का योग चंद्र 12 भी प्रधान करता है,
पर बंदे की घर ग्रहस्थि का नुक़सान करता है।
✍️Er. Rohit Sharma
Feb 26, 2021
चंद्र हो 3जे जो उत्तम; माँ bold और ईरादे मज़बूत होते है,
ग़र हो कही निकम्मा तो दिल कमज़ोर और कायरों के पूत होते हैं।
✍️ Er. Rohit Sharma
Feb 20, 2021
माँ का हुकम जो बजाता रहेगा; चंद्र लगन वाले हर तरह से सुख समृधि पाता रहेगा।
✍️Er. Rohit Sharma
Feb 20, 2021
🌖 चंद्र 1
हाथ पैर ठंडे रहने की शिकायत रहती होगी,
माँ का लाड़ला है दुनिया तुझे कहती होगी।
✍️Er. Rohit Sharma
Dec 29, 2020
Aaj ka chandrama
Dec 20, 2020
रोया होगा वो बाथरूम में ज़रूर,
जब भी आया होगा चंद्र आठ में हज़ूर।
✍️Er. Rohit Sharma
Dec 01, 2020
श्री हनुमान जी अहिरावण को मारने के लिए स्वयं पंचमुखी या पंचमुखी (पांच मुख वाले) अवतार में प्रकट हुए।
अहिरावण एक शक्तिशाली दानव था, वास्तव में, रावण का भाई। उन्होंने रामायण युद्ध के दौरान रावण की मदद करने के लिए राम और लक्ष्मण का अपहरण कर लिया।
एक व्यापक कहानी है जो पंचमुखी हनुमान के रूप को दर्शाती है। यहां हम आपको उनके पाँच मुख वाले रूप से जुड़े तथ्यों और किंवदंतियों का पता लगाने में मदद करने जा रहे हैं। इसलिए, अधिक जानने के लिए स्क्रॉल करते रहें।
विभीषण के रूप में अहिरावण का भेस
पंचमुखी हनुमान मूर्ति
रामायण युद्ध के दौरान, जब लक्ष्मण ने इंद्रजीत को मारा-लंका नरेश का पुत्र। रावण मदद के लिए अपने भाई अहिरावण के पास पहुंचा। वह अंडरवर्ल्ड या पटला का राजा था। जब विभीषण को इस बारे में पता चला, तो वह राम और लक्ष्मण को चेतावनी देने के लिए दौड़ा।
उन्होंने भगवान हनुमान को सचेत रहने और किसी को भी उस परिसर में प्रवेश नहीं करने के लिए कहा जहां भगवान राम और लक्ष्मण निवास करते हैं। अहिरावण ने परिसर में प्रवेश करने की बहुत कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। भगवान हनुमना ने उनकी हर कोशिश को नाकाम कर दिया।
अंत में, अहिरावण ने खुद को विभीषण के रूप में छिपाने का फैसला किया। हनुमान उसे पहचान नहीं सके और उन्होंने उसे उस कमरे में प्रवेश करने दिया जहाँ राम और लक्ष्मण थे। एक बार अहिरावण ने कमरे में प्रवेश किया, उसने राम और लक्ष्मण का अपहरण किया और उन्हें अंडरवर्ल्ड में ले गया।
जब हनुमान को इस घटना के बारे में पता चला, तो वह विभीषण के पास गए और उन्हें इस बारे में जानकारी दी। विभीषण ने हनुमान से कहा कि वे उन्हें जल्दी से छुड़ाएं वरना अहिरावण उनका बलिदान कर देगा।
इसलिए, भगवान हनुमान राम और लक्ष्मण दोनों को बचाने के लिए एक बचाव अभियान पर चले गए।
जब हनुमान अपने पुत्र मकरध्वज से मिले
हनुमान के पुत्र मकरध्वज
"हनुमान का बेटा?", अविश्वसनीय लगता है? हम सभी जानते हैं, भगवान हनुमान एक कट्टर ब्रह्मचारी थे। अद्भुत कहानी के साथ चलें जो आपके पैरों के तलवे को हिला देगी।
जब हनुमान दरवाजे या पाताल में पहुँचे, तो उन्हें एक विचित्र प्राणी ने रोका। उसके पास वानर (धन) का आधा शरीर और आधा सरीसृप था। वह दरवाजे का पहरा था। हनुमान ने उससे पूछा, जिसके बारे में उसने कहा, "मैं तुम्हारा पुत्र मकरध्वज हूँ!" इससे अंजनेय हैरान रह गया क्योंकि वह एक ब्रह्मचारी था।
मकरध्वज ने सबसे विचित्र घटना की व्याख्या की। कहानी इस तरह चलती है। जब अंजनी पुत्रा समुद्र के ऊपर से टकरा रहा था, तो उसके वीर्य की एक बूंद मगरमच्छ के मुंह में गिर गई। यह मकरध्वज के जन्म की कहानी थी।
भगवान हनुमान बनाम अहिरावण
पंचमुखी हनुमान
भगवान हनुमान द्वारा मकरध्वज को हराने के बाद, उन्होंने पाताल लोक में प्रवेश किया। अहिरावण को एक मजबूत सेना का समर्थन प्राप्त था। चंद्रसेन ने अहिरावण को मारने के रहस्य के बारे में उसे बताया कि उसकी जीवन शक्ति पांच अलग-अलग मोमबत्तियों में है, जिन्हें पांच अलग-अलग दिशाओं में रखा गया है। अहिरावण को मारने का एकमात्र तरीका एक ही समय में इन सभी पांच मोमबत्तियों को उड़ाना है।
पंचमुख हनुमान रूप
श्री पंचमुखी हनुमान जी
अंजनेया पुत्रा पाँच मुख वाले रूप में प्रकट हुए और पाँच मोमबत्तियों को बुझा दिया और अहिरावण का वध कर दिया। फिर उन्होंने भगवान राम और लक्ष्मण को बचाया जो एक जादू के जादू से बेहोश अवस्था में थे।
पंचमुखी हनुमान के पांच मुख हैं-
पंचमुखी हनुमान के पांच मुख
श्री हनुमान जी: वह चेहरा जो पूर्व दिशा की ओर है। ऐसा कहा जाता है कि इस रूप की पूजा करने से व्यक्ति अपने पापों से मुक्त हो जाता है और एक शांत और शुद्ध मन प्रदान करता है।
नरसिंह: यह दक्षिण का सामना करता है और अपने दुश्मन पर एक जीत हासिल करता है। नरसिंह भगवान विष्णु के कई अवतारों में से एक है, जिसे उन्होंने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए लिया था।
गरुड़: यह भगवान हनुमान के पांच मुख वाले अवतार का पश्चिम का सामना करना पड़ता है। इस चेहरे की पूजा करने से नकारात्मक प्रभाव, काला जादू और बुरी आत्माओं से छुटकारा मिलता है।
वराह: अंजनेया का यह मुख उत्तर दिशा की ओर है और यह दुर्भावनापूर्ण या बुरे ग्रहों के प्रभावों को दूर करता है।
हयग्रीव: यह ऊपर की दिशा का सामना करता है। इस मुख की पूजा करने वालों को ज्ञान और संतान की प्राप्ति होती है। भगवान हनुमान के इस रूप को पंचमुखी / पंचमुखी अंजनेय कहा जाता है।
पंचमुखी हनुमान को मानने के पांच तरीके
भक्त भगवान हनुमान के पांच मुख वाले अवतार की पूजा कर सकते हैं-
• नमन
• स्मरण
• कीर्तनम्
• यचनाम
• अर्पणम
पांच मुंह वाले अंजनेया के हथियार
पंचमुखी हनुमान के हथियार
पांच मुंह वाले हनुमान के हथियार हैं-
• परशु
• खंडा
• चक्र
• धमाल
• गदा
• त्रिशूला
• कुंभ
• कटार
• एक थाली खून से भर गई और फिर से एक बड़ा गदा।
Nov 28, 2020
चंद्र 11
ना रहेगा कोई दुःख और बारिश पैसे की हो रही हो,
जब तक तेरी माता घर में पड़े पत्थर को दूध से धो रही हो।
✍️Er. ROHIT SHARMA
Nov 28, 2020
माँ के साथ बड़ा प्यार होता है
जब चंद्र 1,2 या चार होता है।
✍️Er. ROHIT SHARMA
Nov 27, 2020
30 ko chandra grahan melbourne me sabse pehle.. bane rahiyega 3 din shesh
Nov 19, 2020
ख़र्च जितना करेगा धन उतना बढ़ेगा,
चंद्र 4 वाले माँ का आशीर्वाद तेरी हर मुसीबत से लड़ेगा।
✍️Er. ROHIT SHARMA
Nov 13, 2020
चंद्र 8 में है उम्र गुजरी है कुछ इस तरह साक़ी,
ना माँ ने अधिक सुख देखे ना मेरे अरमान रहे बाक़ी।
✍️Er. Rohit Sharma
Nov 13, 2020
ना रहे कोई मक़सद और ना ही रहे कोई मंसूबे, चंद्र 8 में था रहे ग़म में या नशे में डूबे।
✍️Er. Rohit Sharma
Nov 10, 2020
On November 11, Hindus will be celebrating Rama Ekadashi considered to be the most auspicious of all the Ekadashis in a year. This ekadashi falls four days before Diwali on the 11th day of Kartik month during Krishna Paksh (waning phase of the moon). So Rama Ekadashi is also known as Kartik Krishna Ekadashi or Rambha Ekadashi . On this day, devotees worship Lord Vishnu and Goddess Lakshmi. An interesting fact is that Rama is another name of Goddess Lakshmi.
How it is observed?
The most important ritual of this ekadashi is observing fasts. The fast begins a day before with one-time satvik meal before sunset. On the day of Rama Ekadashi, devotees observe a fast without any food grains. Moreover, it is also believed that people who do not observe the fast should also refrain from eating rice and grains. On this day, the devotees worship Lord Vishnu and Goddess Lakshmi, supplicate them, perform the aarti and then distribute the supplicated food among family members. On this day, devotees also prepare a ‘bhog’ as an offering for Lord Vishnu and Goddess Lakshmi. Devotees perform vigil throughout the day and night, reciting mantras and shlokas form Bhagwat Gita.
Significance
Rama Ekadashi is considered as an auspicious day to get rid of all sins even those acquired by killing a Brahmin. One who observes this fast attains happiness, salvation and pleasure for the lifetime and beyond. Observing this fast is equivalent to performing 100 Rajasuya Yagyas or 1000 Ashvamedha Yagyas.
Story behind Rama Ekadashi
As recited in Mahabharata by Lord Krishna to Pandava Yudhishthir, the significance of the day draws back to the devotion of Chandrabagha, her father Muchukunda and her husband Shobhana. According to the legend, King Muchukunda and his daughter Chandrabagha fervently observed Rama Ekadashi. So much that the king ordered the whole kingdom to not consume anything on the day of Rama Ekadashi. When Chandrabhaga got married to Shobhana who was also a king, the couple started observing the fast together. However, Shobhana became physically weak due to the fasts and any more such abstains might have taken his life. Even then, Shobhana observed the fast and consequently died at the midnight.
But because of the merits he had earned by observing the fast despite being weak, he was made the king of a celestial kingdom. However, the kingdom was not visible and was transient. When Chandrabagha got to know about her husband’s kingdom through a Brahaman, she also ventured out to live with him. And the merits that she had earned by observing fasts for all her life made Shobhana’s kingdom visible and prosperous forever. The couple then lived happily together.
Watching from a feminist lens
It is interesting that the festival is named after Goddess Lakshmi. However, it is disheartening that her value on the day is not more than a consort of Lord Vishnu who gets the most attention and worship. Why can’t there be a festival solely dedicated to Goddess Lakshmi as there are many for Lord Vishnu? The reason no doubt is the patriarchal mindset that is reluctant to give credits and identity to women as an individual. Her name, success and family, everything is defined through the male counterpart. She cannot possibly have a significance and social standing without the male partner. She is deprived of her own value as a free thinking human with agency to choose. And when people venerate women of the real world as Goddess Lakshmi’s reincarnation, patriarchal stereotypes are automatically normalised as God’s plan.
Goddesses that we worship today are portrayed according to a patriarchal male gaze. They are either a consort of male God or a feminine representation of their powers. But if beliefs are all about our glance and mindset, then why can’t our goddesses have an identity of their own? Why can’t they be a reflection of womanhood and feminism that defines today’s age?
It has been ages now when religion and beliefs were defined word to word and put on our plates. But now it is 2020 and high time for us to change the words of the belief if not the crux of it. If certain custom has been patriarchal traditionally, why can’t we reinterpret it from a feminist perspective?
Nov 08, 2020
अहोई अष्टमी का व्रत 8 नवंबर यानी आज है। इस व्रत को संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान को दीघार्यु के साथ समृद्धि की भी प्राप्ति होती है। कहते हैं कि अहोई माता के आशीर्वाद से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अहोई अष्टमी के दिन माता पार्वती की पूजा का विधान है। दिवाली से 8 दिन पहले रखा जाने वाला व्रत मुख्य रूप से उत्तर भारत की महिलाएं रखती हैं।
अहोई अष्टमी की तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त-
अष्टमी तिथि प्रारंभ- 8 नवंबर 2020 को सुबह 07 बजकर 29 मिनट से।
अष्टमी तिथि समाप्त- 9 नवंबर 2020 को सुबह 06 बजकर 50 मिनट तक।
पूजा का मुहूर्त- 8 नवंबर को शाम 05 बजकर 31 मिनट से शाम 06 बजकर 50 मिनट तक।
कुल अवधि- 1 घंटे 19 मिनट।
तारों को देखने का समय- 8 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 56 मिनट।
चंद्रोदय का समय- 8 नवंबर 2020 को रात 11 बजकर 56 मिनट तक।
अहोई अष्टमी के दिन ऐसे करें पूजा (Ahoi Ashtami Puja Vidhi)-
करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद अष्टमी तिथि को देवी अहोई व्रत मनाया जाता है । गोबर से या चित्रांकन के द्वारा कपड़े पर आठ कोष्ठक की एक पुतली बनाई जाती है और उसके बच्चों की आकृतियां बना दी जाती हैं। माताएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को या प्रदोष काल उसकी पूजा करती हैं।
करवाचौथ में इस्तेमाल किए गए करवे में जल भर लिया जाता है। शाम को माता की विधि-विधान से पूजा के बाद उन्हें फल, फूल और मिठाई भोग लगाते हैं। उसके बाद तारों को करवे से अर्घ्य देने के बाद रात में व्रत का समापन किया जाता है। इसके बाद अहोई माता की व्रत कथा सुनने के बाद अन्न-जल ग्रहण किया जाता है। उस करवे के जल को दीपावली के दिन पूरे घर में छिड़का जाता है। मान्यता है कि अहोई माता की पूजा करके उन्हें दूध-चावल का भोग लगाना शुभ होता है।
अहोई माता की कथा (Ahoi Ashtami Vrat Katha)-
एक साहूकार के 7 बेटे थे और एक बेटी थी। साहूकार ने अपने सातों बेटों और बेटी की शादी कर दी थी। अब उसके घर में सात बेटों के साथ सात बहुएं भी थीं।
साहूकार की बेटी दिवाली पर अपने ससुराल से मायके आई थी। दिवाली पर घर को लीपना था, इसलिए सारी बहुएं जंगल से मिट्टी लेने गईं। साहुकार की बेटी भी अपनी भाभियों के साथ चल पड़ी।
साहूकार की बेटी जहां मिट्टी काट रही थी, उस स्थान पर स्याहु (साही) अपने साथ बेटों से साथ रहती थी। मिट्टी काटते हुए गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी के चोट से स्याहु का एक बच्चा मर गया। इस पर क्रोधित होकर स्याहु ने कहा कि मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी।
स्याहु के वचन सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभियों से एक-एक कर विनती करती हैं कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें। सबसे छोटी भाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है। इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते हैं, वे सात दिन बाद मर जाते हैं। सात पुत्रों की इस प्रकार मृत्यु होने के बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसका कारण पूछा। पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी।
सुरही सेवा से प्रसन्न होती है और छोटी बहु से पूछती है कि तू किस लिए मेरी इतनी सेवा कर रही है और वह उससे क्या चाहती है? जो कुछ तेरी इच्छा हो वह मुझ से मांग ले। साहूकार की बहू ने कहा कि स्याहु माता ने मेरी कोख बांध दी है जिससे मेरे बच्चे नहीं बचते हैं। अगर आप मेरी कोख खुलवा दें तो मैं आपका उपकार मानूंगी। गाय माता ने उसकी बात मान ली और उसे साथ लेकर सात समुद्र पार स्याहु माता के पास ले चली।
रास्ते में थक जाने पर दोनों आराम करने लगते हैं। अचानक साहूकार की छोटी बहू की नजर एक ओर जाती हैं, वह देखती है कि एक सांप गरूड़ पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है। इतने में गरूड़ पंखनी वहां आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है कि छोटी बहू ने उसके बच्चे को मार दिया है इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है।
छोटी बहू इस पर कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है। गरूड़ पंखनी इस पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें स्याहु के पास पहुंचा देती है।
वहां छोटी बहू स्याहु की भी सेवा करती है. स्याहु छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहू होने का आशीर्वाद देती है। स्याहु छोटी बहू को सात पुत्र और सात पुत्रवधुओं का आर्शीवाद देती है। और कहती है कि घर जाने पर तू अहोई माता का उद्यापन करना। सात सात अहोई बनाकर सातकड़ाही देना। उसने घर लौट कर देखा तो उसके सात बेटे और सात बहुएं बेटी हुई मिली। वह खुशी के मारे भाव-भिवोर हो गई। उसने सात अहोई बनाकर सातकड़ाही देकर उद्यापन किया।
अहोई का अर्थ एक यह भी होता है 'अनहोनी को होनी बनाना।' जैसे साहूकार की छोटी बहू ने कर दिखाया था। जिस तरह अहोई माता ने उस साहूकार की बहू की कोख को खोल दिया, उसी प्रकार इस व्रत को करने वाली सभी नारियों की अभिलाषा पूर्ण करें।
Oct 05, 2020
Melted icecream या custard का शौक़ीन बना देता है
चंद्र 10 11 में हो तो nightlife रंगीन बना देता है।
✍️Er. Rohit Sharma
Sep 07, 2020
मिला है रास्ते में हर शक़्स पूछने को मंज़िल,
चंद्र चार में हो तो बना देता है बंदे को बुज़दिल।
✍️Er. Rohit Sharma
Sep 07, 2020
मर गये सानु मारण वाले,
चंद्र 10 भोले शंकर उम्र दी नाँव तारन वाले।
✍️Er. Rohit Sharma
(चंद्र10 उम्र अमूमन लम्बी)
Aug 24, 2020
Moon 12
वो रक़ीबों की महफ़िल थी के अपनो की,
बोली हक़ीक़त की लगी थी के सपनो की।
✍️Er. Rohit Sharma
Aug 21, 2020
Chandra 🌓 6 / Chandra 12 🌓
वो वक्त की मार थी के अपनो की,
आवाज़ टूटने की दिल की थी के सपनो की।
✍️Er. Rohit Sharma
Aug 18, 2020
वक्त तो बहुत मिला पर ना मिला स्कून और ना मिली माया है।
चंद्र 8 वाला भी ए खुदा क्या तकदीर लेकर आया है।
✍️ Er. Rohit Sharma
Jul 23, 2020
🌖 के उपाये। Remedies of Moon 🌓 in 1st House.
Jul 23, 2020
🌓 चंद्र 11 वाले समंदर की यात्रा देगी मोती,
सब दुःख कटेंगे अगर माता रहे दूध से आँखें धोती।
✍️Er. Rohit Sharma
Jul 23, 2020
चंद्र 11 वाले मोतियों की माला माता को पहनाता जा,
धन दौलत ख़ुशियाँ और समृधि खुद ब खुद पाता जा।
✍️Er. Rohit Sharma
Jul 20, 2020
चंद्र शनी की युति हो तो बर्फ़ का शिवलिंग बना के सावन के महीने में पूजा करनी चाहिए।
Jul 18, 2020
चंद्र लगन में है और लगने लगे जो किसी चीज़ से डर,
सुबह उठकर माता के पाँव छूकर आशिर्वाद लिया कर.
✍Er. Rohit Sharma
Jul 18, 2020
चंद्र लगन में है चेक वाली जैकेट कम पहना कर,
बातों को दिल पे मत लिया कर आँखों से बहना कर.
✍Er. Rohit Sharma
Apr 26, 2020
अक्षय तृतीया, जिसे अक्ती या अखा तीज के नाम से भी जाना जाता है, हिंदुओं और जैनियों का एक वार्षिक बसंत उत्सव है। यह वैशाख महीने के ब्राइट हाफ (शुक्ल पक्ष) की तीसरी तीथ (चंद्र दिन) को पड़ता है। यह भारत और नेपाल में हिंदुओं और जैनों द्वारा क्षेत्रीय रूप से एक शुभ समय के रूप में मनाया जाता है, "संयुक्त समृद्धि के तीसरे दिन" के रूप में।
Feb 25, 2020
शने शने चलने वाला जब चंचल चंद्र घर आता है,
भरे कूए भी ख़ाली होते सूखा मामू घर पड़ जाता है।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Feb 12, 2020
चंद्र लगन का है चेहरा गोल बना देगा,
माँ के लिए तुझे अनमोल बना देगा।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Feb 11, 2020
आँखो में मगरमच्छ के आँसू होते है,
चंद्र लगन वाले बात बात पे रोते हैं।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 25, 2020
अनेक लड़कियों से जुड़ी तार देखी है,
पर चंद्र सात वाले की माँ मोस्ट्ली बीमार देखी है।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 23, 2020
चंद्र दो याँ चंद्र लगन वाली लिप्स्टिक कम ही लगाती होगी,
बिना मेक अप किए ही आँखो में चमक आती होगी।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 20, 2020
Like share and sing 🎤 along to get good results of 🌕 moon.🙏🙏🙏 #chandra grah mantra. Moon mantra.
Jan 12, 2020
आँखों में नमी ही रहती है, धन दौलत की कमी ही रहती है।
चंद्र आया जब आठ में, उमर समंदर लम्बी पर गमी ही रहती है।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 11, 2020
पहाड़ों की यात्रा तू जब भी करेगा,
चंद्र पाँच में दुखों का झरना बहेगा।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 08, 2020
तेरी खामोशी ही तेरी बर्बादी का कारण बनेगी,
जब चंद्र बारा की कोह्सार चलेगी।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 08, 2020
आफ़ताब का वो चाँद 🌕 होता है,
जिसका शुक़ चंद्र लगन में साथ होता है।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 07, 2020
अपने दिल की बात कभी ना किसी को बताना,
चंद्र छे में है नहीं तो पड़ेगा तुझे पछताना।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 07, 2020
चंद्र छे में पनीर और रसगुल्ले तू खाता होगा,
जब भी मुश्किलें आए भाग जाता होगा।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 07, 2020
🌙 चंद्र सात में,
तेरी बीवी और माँ ना रहेंगी साथ में।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 07, 2020
🌓 चंद्र लगन में छुपता छुपाता रहता है,
बहुत कम से दिल की बात करता है बाकीयों से मुस्कुराता रहता है।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 06, 2020
बार बार ताले चेक करने की आदत होती है,
चंद्र तीन में इस्त्रीयों की इबादत होती है।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 06, 2020
दूध पीने का तू शौक़ीन होगा,
जब चंद्र दो का कुण्डली में सीन होगा।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 06, 2020
चंद्र दो में बंदा कूल होता है,
घर के पास स्कूल होता है।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 05, 2020
रातों को उठ उठ कर दिन के लिए रोते हैं,
चंद्र आठ वाले ऐसे ही तो होते हैं।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 04, 2020
नादानी सी रहती है परेशनी सी रहती है,
चंद्र गेयारा में तेरी अपनी माँ बेगानी सी रहती है।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 04, 2020
तुझे इस्तेमाल कर पास होंगे,
चंद्र दस में बैक-बेंचेरस मित्र तेरे ख़ास होंगे।
✍️रोहित शर्मा🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 04, 2020
बारिश का पानी इक़ठा कर और काँच की बोतल में भर,
चंद्र बारा में बैठे का फिर कैसा तुझे डर।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 04, 2020
चंद्र दस में कुछ भी करने से पहले क्यूँ दो बार तू नहीं सोचता,
हर शादी फ़ंक्शन पार्टी में क्यूँ लेट तू है पहुँचता।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 02, 2020
थोड़ा सा भी पानी जो तूने बीमारों को पिलाया होता,
चंद्र छे में आज ये दिन देखने को ना आया होता।
✍️रोहित शर्मा🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Jan 02, 2020
चंद्र गेयारा में ना ग़म तुझे काटेगा,
ग़र तू ग़रीबों में दूध खोया बाँटेगा।
✍️रोहित शर्मा 🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Dec 30, 2019
चंद्र दो जो तेरी कुंडली में आयेगा,
43 दिन के अन्दर तू अपने घर में दूसरा जनमदिन मनाएगा।
✍️रोहित शर्मा🇦🇺🇦🇺🇦🇺🙏
Dec 30, 2019
सारे फ़ैसले जब जल्दी में कर डालता है,
चंद्र दास वाला अपने पैरों पे ख़ुद कुल्हाड़ी मारता है।
✍️रोहित शर्मा🇦🇺
Dec 28, 2019
मैं में मैं नहीं होती जिसकी कुंडली में चंद्र तीन आता है,
किसी से भी पूछ के देख लेना बंदा क्रीम पेस्ट्री चावल बड़े खाता है।
🖋रोहित शर्मा🙏
Dec 28, 2019
मतलब चंद्र छे ख़रगोश की कहानी-
- ऐसा जातक दिखने में क्यूट होगा जैसा ख़रगोश
- ऐसा जातक कुरेदता बहुत है, याँ तो हाथ फ़्री नहीं रखता याँ क्वेस्चन पूछता रहता है।
- ऐसा जातक दूसरों को अब्ज़र्व बहुत करता है।
- ऐसा जातक मुश्किलों से और परेशनीयो से भागता रहता है।
यही राज है ख़रगोश की कहानी का चंद्र छे में।
Dec 28, 2019
चंद्र छे ख़रगोश की कहानी है,खुर्च खुर्च तुम खुरचे क्यूँ, घूर घूर तुम देखे क्यूँ, हम आए तुम भागे क्यूँ, बस यही कहानी सबको सुनानी है।
🖋रोहित शर्मा 🙏
Dec 28, 2019
कभी ना कभी तो आँखो में नमी होगी,
चंद्र बारा वाले को ग्रहस्थ सुख में कमी होगी।
🖋रोहित शर्मा
Dec 28, 2019
चंद्र बारा वाले का बस यही तराना,
आता है याद आज भी वो गुज़रा हुआ ज़माना।
🖋रोहित शर्मा
Dec 28, 2019
तेल क्यूँ ना गाड़ी में तू फुल्ल भरवाता,
चंद्र चार तेरा क्यूँ है तुझे कंजूस बनाता।
🖋रोहित शर्मा
Dec 28, 2019
चंद्र गेयारा अच्छे की एक बात ख़ास होगी,
सर से गंगा निकलते हुए शिवजी की फ़ोटो इसके पास होगी।
🖋रोहित शर्मा
Dec 28, 2019
चंद्र पाँच जो धर्मी होवे, राज दरबार इज़्ज़त पाता है,
जिसके साथ वो जुड़ जाता, चिड़ियाँ नाल बाज लड़ाता है।
🖋रोहित शर्मा
Dec 28, 2019
सब्ज रंग से परहेज़ रख,
चंद्र लगन में है तेरा,
दिमाग़ तेज रख।
🖋रोहित शर्मा
Dec 27, 2019
बीते दिनो की बात वो करता रहता है,
चंद्र जिसका खाना बारा में मरता रहता है।
🖋रोहित शर्मा
Dec 27, 2019
चुपके से दीदार करता है,
चंद्र ५ वाला एक तरफ़ा प्यार करता है ।
🖊रोहित शर्मा
Dec 27, 2019
चंद्र गेयारा में पीड़ित हो तो नरक करेगी,
तेरी ख़ुद की माँ/दादी तुजसे ही फ़र्क़ करेगी।
🖊रोहित शर्मा
Dec 26, 2019
मिलो ना तुम तो हम घबराए मिलो तो आँख चुराए चंद्र पाँच आ गेया है।
🖋रोहित शर्मा
Dec 26, 2019
आलीशान बंगलो में भी सन्नाटा होगा,
चंद्र अगर तेरी कुंडली में आठ में आता होगा।
🖋रोहित शर्मा